About Psychodiagnostic
हरमन रोर्शा की मौलिक कृति "साइकोडायग्नोस्टिक" (1921) रोर्शा स्याही धब्बा परीक्षण की विस्तृत प्रस्तुति है, जो व्यक्तित्व मूल्यांकन के लिए एक प्रक्षेपी तकनीक है। यह पुस्तक परीक्षण के प्रशासन, स्कोरिंग और व्याख्या के लिए एक व्यवस्थित विधि का वर्णन करती है। रोर्शा का तर्क है कि व्यक्ति की अस्पष्ट स्याही के धब्बों की धारणा और व्याख्या उनकी अंतर्निहित मनोवैज्ञानिक संरचनाओं, विचार प्रक्रियाओं और भावनात्मक स्थितियों को प्रकट करती है। यह पुस्तक इस विचार पर आधारित है कि प्रत्यक्षीकरण केवल बाहरी उत्तेजनाओं को प्राप्त करना नहीं है, बल्कि व्यक्ति के आंतरिक अनुभवों और व्यक्तित्व का एक सक्रिय प्रक्षेपण भी है।
यह कार्य नैदानिक मनोविज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिसने व्यक्तित्व मूल्यांकन के लिए एक मानकीकृत प्रक्षेपी विधि की शुरुआत की। "साइकोडायग्नोस्टिक" ने मनोवैज्ञानिक निदान और उपचार योजना में व्यक्ति की अचेतन प्रक्रियाओं को समझने के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया। यद्यपि बाद में इसकी वैज्ञानिक वैधता और वस्तुनिष्ठता पर बहस हुई, फिर भी इसने प्रक्षेपी परीक्षण के क्षेत्र की नींव रखी और दशकों तक नैदानिक मनोविज्ञान और मनोरोग विज्ञान को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया। यह पुस्तक रोर्शा के जीवनकाल की एकमात्र प्रकाशित कृति थी, जिसने उन्हें मनोविज्ञान के इतिहास में एक स्थायी स्थान दिलाया।
Key takeaways
- स्याही के धब्बों की व्याख्या से व्यक्ति के व्यक्तित्व और मानसिक प्रक्रियाओं का पता चल सकता है।
- रोर्शा स्याही धब्बा परीक्षण व्यक्तित्व मूल्यांकन के लिए एक प्रक्षेपी तकनीक के रूप में कार्य करता है।
- परीक्षण प्रतिक्रियाओं का सावधानीपूर्वक विश्लेषण अंतर्निहित मनोवैज्ञानिक संरचनाओं को प्रकट करता है।
- यह पुस्तक मनोवैज्ञानिक निदान में वस्तुनिष्ठता लाने का प्रारंभिक प्रयास प्रस्तुत करती है।
- रोर्शा परीक्षण ने नैदानिक मनोविज्ञान में प्रक्षेपी तकनीकों के विकास को प्रभावित किया।
- परीक्षण के परिणाम व्यक्ति की धारणा, भावना और विचार पैटर्न में अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।
Key ideas at a glance
व्यक्तित्व मूल्यांकन
- स्याही के धब्बों की व्याख्या से व्यक्ति के व्यक्तित्व और मानसिक प्रक्रियाओं का पता चल सकता है।
प्रक्षेपी तकनीकें
- रोर्शा स्याही धब्बा परीक्षण व्यक्तित्व मूल्यांकन के लिए एक प्रक्षेपी तकनीक के रूप में कार्य करता है।
मनोवैज्ञानिक निदान
- परीक्षण प्रतिक्रियाओं का सावधानीपूर्वक विश्लेषण अंतर्निहित मनोवैज्ञानिक संरचनाओं को प्रकट करता है।
प्रत्यक्षीकरण की भूमिका
- यह पुस्तक मनोवैज्ञानिक निदान में वस्तुनिष्ठता लाने का प्रारंभिक प्रयास प्रस्तुत करती है।
अचेतन मन
- रोर्शा परीक्षण ने नैदानिक मनोविज्ञान में प्रक्षेपी तकनीकों के विकास को प्रभावित किया।
Chapter summaries
परिचय और समस्या का सूत्रीकरण
हरमन रोर्शाक की यह पुस्तक मनोवैज्ञानिक निदान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और मौजूदा विधियों की सीमाओं पर प्रकाश डालती है। लेखक एक नई, वस्तुनिष्ठ और मानकीकृत विधि की आवश्यकता पर जोर देते हैं जो व्यक्तित्व की गहरी संरचनाओं को उजागर कर सके। इसमें पूर्ववर्ती प्रयासों, जैसे कि बिनेट के परीक्षणों और अन्य प्रक्षेपी तकनीकों का संक्षिप्त उल्लेख है, और बताया गया है कि कैसे स्याही के धब्बों का उपयोग एक व्यवस्थित नैदानिक उपकरण के रूप में किया जा सकता है। रोर्शाक ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे प्रतिक्रियाओं की व्याख्या व्यक्ति की मानसिक प्रक्रियाओं का एक सीधा प्रतिबिंब प्रदान कर सकती है, जिससे व्यक्तित्व की छिपी हुई गतिशीलता को समझा जा सके।
विधि का विवरण
यह खंड रोर्शाक स्याही धब्बा परीक्षण की विस्तृत प्रक्रिया का वर्णन करता है। इसमें दस मानक स्याही धब्बे (पांच काले और सफेद, दो लाल और काले, तीन बहुरंगी) शामिल हैं, जिन्हें एक विशिष्ट क्रम में प्रस्तुत किया जाता है। लेखक परीक्षण के प्रशासन के लिए निर्देश देते हैं, जिसमें प्रतिक्रियाओं को रिकॉर्ड करना, पूछताछ करना और प्रतिक्रिया समय का ध्यान रखना शामिल है। यह खंड परीक्षण सामग्री की प्रकृति, जैसे कि धब्बों की समरूपता और अस्पष्टता, और उनके मनोवैज्ञानिक महत्व पर भी चर्चा करता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षण का प्रशासन मानकीकृत हो ताकि परिणामों की तुलना की जा सके और उनकी विश्वसनीयता बनी रहे।
व्याख्या के सिद्धांत
रोर्शाक परीक्षण की व्याख्या के मूलभूत सिद्धांतों को प्रस्तुत किया गया है। यह खंड बताता है कि प्रतिक्रियाओं को चार मुख्य श्रेणियों में कैसे वर्गीकृत किया जाता है: स्थान (जहाँ प्रतिक्रिया देखी गई), निर्धारक (क्या प्रतिक्रिया को प्रेरित किया), सामग्री (प्रतिक्रिया क्या है), और मौलिकता (प्रतिक्रिया कितनी सामान्य या असामान्य है)। लेखक इन श्रेणियों के महत्व पर जोर देते हैं और बताते हैं कि कैसे इन तत्वों का संयोजन व्यक्ति के व्यक्तित्व और मानसिक स्थिति का एक व्यापक चित्र प्रदान करता है। यह खंड इन विभिन्न तत्वों के बीच जटिल अंतःक्रिया को समझने के लिए एक रूपरेखा स्थापित करता है।
स्थान के निर्धारक
यह भाग प्रतिक्रियाओं के स्थान के विश्लेषण पर केंद्रित है। इसमें बताया गया है कि प्रतिक्रियाओं को कैसे वर्गीकृत किया जाता है: पूरे धब्बे (W), बड़े सामान्य विवरण (D), छोटे असामान्य विवरण (Dd), और सफेद स्थान (S)। रोर्शाक इन विभिन्न स्थानों के मनोवैज्ञानिक अर्थों की व्याख्या करते हैं, जैसे कि W प्रतिक्रियाएँ अमूर्त सोच और संश्लेषण क्षमता को दर्शाती हैं, जबकि Dd प्रतिक्रियाएँ विवरण पर अत्यधिक ध्यान या चिंता का संकेत दे सकती हैं। सफेद स्थान का उपयोग अक्सर नकारात्मकता या विरोध का संकेत देता है। यह खंड व्यक्ति की धारणात्मक शैली और समस्या-समाधान के दृष्टिकोण को समझने में मदद करता है।
निर्धारक के प्रकार
यह खंड उन विभिन्न मनोवैज्ञानिक कारकों की पड़ताल करता है जो एक प्रतिक्रिया को निर्धारित करते हैं। मुख्य निर्धारकों में रूप (F), मानव गति (M), और रंग (C) शामिल हैं। रोर्शाक इन निर्धारकों की पहचान और स्कोरिंग के लिए विस्तृत दिशानिर्देश प्रदान करते हैं। वह यह भी बताते हैं कि कैसे इन निर्धारकों का संतुलन व्यक्ति के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताओं, जैसे कि अंतर्मुखता, बहिर्मुखता, भावनात्मक प्रतिक्रिया और वास्तविकता के साथ संबंध को दर्शाता है। यह खंड यह समझने के लिए महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति अपनी धारणाओं को कैसे संरचित करता है और किन मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का उपयोग करता है।
रूप प्रतिक्रियाएँ (F)
यह खंड उन प्रतिक्रियाओं पर केंद्रित है जो पूरी तरह से स्याही धब्बे के आकार या रूप पर आधारित होती हैं। रोर्शाक F+ (अच्छे रूप) और F- (खराब रूप) प्रतिक्रियाओं के बीच अंतर करते हैं, जो वास्तविकता परीक्षण और बौद्धिक नियंत्रण की गुणवत्ता का संकेत देते हैं। वह बताते हैं कि उच्च F+ प्रतिशत अच्छी बौद्धिक क्षमता और आत्म-नियंत्रण को दर्शाता है, जबकि उच्च F- प्रतिशत वास्तविकता से बिगड़ा हुआ संपर्क या मानसिक विकार का संकेत दे सकता है। यह खंड व्यक्ति की बौद्धिक दक्षता, तर्कसंगतता और बाहरी दुनिया को सटीक रूप से समझने की क्षमता का मूल्यांकन करने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।
गति प्रतिक्रियाएँ (M)
मानव गति (M) प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण किया जाता है, जो धब्बे में मानव या मानव जैसी आकृति की गति को देखने से संबंधित होती हैं। रोर्शाक M प्रतिक्रियाओं को अंतर्मुखता, कल्पना, रचनात्मकता और आंतरिक जीवन की समृद्धि से जोड़ते हैं। वह बताते हैं कि M प्रतिक्रियाओं की संख्या और गुणवत्ता व्यक्ति की आंतरिक संसाधनों और आत्मनिरीक्षण क्षमता का एक महत्वपूर्ण संकेतक है, और यह कि M प्रतिक्रियाओं की कमी भावनात्मक सपाटता या बाहरी उत्तेजना पर अत्यधिक निर्भरता का संकेत दे सकती है। M प्रतिक्रियाएँ व्यक्ति की कल्पनाशील क्षमता और आंतरिक प्रेरणाओं को समझने में मदद करती हैं।
रंग प्रतिक्रियाएँ (C)
यह खंड रंग (C) प्रतिक्रियाओं की पड़ताल करता है, जो धब्बे के रंग से प्रभावित होती हैं। रोर्शाक विभिन्न प्रकार की रंग प्रतिक्रियाओं को वर्गीकृत करते हैं: FC (रूप और रंग का संतुलन), CF (रंग पर अधिक जोर), और C (केवल रंग)। वह इन प्रतिक्रियाओं को बहिर्मुखता, भावनात्मकता, आवेग नियंत्रण और बाहरी दुनिया के प्रति प्रतिक्रियाशीलता से जोड़ते हैं। FC प्रतिक्रियाएँ अच्छी भावनात्मक समायोजन का संकेत देती हैं, जबकि CF और C प्रतिक्रियाएँ भावनात्मक अस्थिरता या आवेगशीलता का संकेत दे सकती हैं। यह खंड व्यक्ति की भावनात्मक प्रतिक्रियाओं और सामाजिक संपर्क की शैली को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
सामग्री और मौलिकता
यह खंड प्रतिक्रियाओं की सामग्री (जैसे मानव, पशु, प्रकृति, वस्तुएँ) और उनकी मौलिकता (सामान्य या असामान्य) के विश्लेषण पर केंद्रित है। रोर्शाक बताते हैं कि सामग्री व्यक्ति की रुचियों, चिंताओं और अचेतन विचारों को कैसे प्रकट कर सकती है। मौलिकता (O+) प्रतिक्रियाएँ रचनात्मकता और असामान्य लेकिन उपयुक्त धारणा का संकेत देती हैं, जबकि सामान्य (P) प्रतिक्रियाएँ सामाजिक अनुरूपता को दर्शाती हैं। सामग्री विश्लेषण व्यक्ति के आंतरिक अनुभवों और प्रतीकात्मक सोच में अंतर्दृष्टि प्रदान करता है, जबकि मौलिकता व्यक्ति की रचनात्मकता और पारंपरिक सोच से विचलन को दर्शाती है।
मनोवैज्ञानिक (The Psychogram)
यह खंड रोर्शाक परीक्षण के परिणामों को सारांशित करने के लिए "मनोवैज्ञानिक" नामक एक मात्रात्मक प्रोफ़ाइल के निर्माण का वर्णन करता है। मनोवैज्ञानिक विभिन्न स्कोरिंग श्रेणियों (W, D, Dd, F+, F-, M, C, आदि) के सापेक्ष अनुपात को ग्राफिक रूप से प्रस्तुत करता है। यह प्रोफ़ाइल व्यक्ति के व्यक्तित्व की एक व्यापक तस्वीर प्रदान करती है, जिसमें उनकी बौद्धिक क्षमता, भावनात्मक संतुलन, अंतर्मुखता-बहिर्मुखता का संतुलन और वास्तविकता के साथ संबंध शामिल हैं। मनोवैज्ञानिक विभिन्न कारकों के बीच संबंधों को स्पष्ट करता है और एक संरचित तरीके से व्यक्तित्व का एक समग्र दृश्य प्रस्तुत करता है।
नैदानिक अनुप्रयोग
रोर्शाक परीक्षण के नैदानिक अनुप्रयोगों पर चर्चा की गई है। लेखक विभिन्न मनोरोग स्थितियों, जैसे कि सिज़ोफ्रेनिया, अवसाद, न्यूरोसिस और बौद्धिक अक्षमता वाले रोगियों के परीक्षण परिणामों के उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। वह बताते हैं कि कैसे विशिष्ट प्रतिक्रिया पैटर्न और मनोवैज्ञानिक प्रोफ़ाइल इन स्थितियों के निदान और विभेदक निदान में सहायता कर सकते हैं। यह खंड परीक्षण की नैदानिक उपयोगिता और इसके द्वारा प्रदान की जाने वाली गहरी अंतर्दृष्टि पर जोर देता है, जिससे चिकित्सकों को रोगी की मानसिक स्थिति और व्यक्तित्व की गतिशीलता को समझने में मदद मिलती है।
सैद्धांतिक विचार
यह खंड रोर्शाक परीक्षण के पीछे के मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों पर विचार करता है। रोर्शाक व्यक्तित्व की संरचना, धारणा की प्रकृति और अचेतन प्रक्रियाओं के साथ परीक्षण के संबंध पर चर्चा करते हैं। वह बताते हैं कि कैसे स्याही धब्बे व्यक्ति को अपनी आंतरिक दुनिया को प्रक्षेपित करने का अवसर प्रदान करते हैं, जिससे उनके व्यक्तित्व की गहरी परतों तक पहुंचा जा सकता है। यह खंड परीक्षण की वैधता और विश्वसनीयता के मुद्दों पर भी संक्षिप्त रूप से विचार करता है, और यह बताता है कि कैसे यह विधि व्यक्तित्व के गतिशील और जटिल पहलुओं को समझने के लिए एक शक्तिशाली उपकरण है।
निष्कर्ष
पुस्तक के निष्कर्ष में, रोर्शाक अपने शोध के मुख्य निष्कर्षों को सारांशित करते हैं और मनोचिकित्सा और मनोविज्ञान में स्याही धब्बा विधि के भविष्य के लिए निहितार्थों पर चर्चा करते हैं। वह परीक्षण की सीमाओं को स्वीकार करते हैं लेकिन इसकी अद्वितीय नैदानिक क्षमता और व्यक्तित्व मूल्यांकन के लिए इसके मूल्य पर जोर देते हैं। वह आगे के शोध और विधि के मानकीकरण के महत्व पर भी प्रकाश डालते हैं, ताकि रोर्शाक परीक्षण का उपयोग और अधिक प्रभावी और व्यापक हो सके। यह खंड विधि की निरंतर प्रासंगिकता और विकास की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
Full summary
पुस्तक का अवलोकन
"Psychodiagnostic" एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक ग्रंथ है जो मानसिक स्वास्थ्य के मूल्यांकन और निदान की प्रक्रिया को समझाने के लिए लिखा गया है। यह पुस्तक विशेष रूप से मनोवैज्ञानिक परीक्षणों, उनके उपयोग और परिणामों पर केंद्रित है। लेखक ने इस पुस्तक में विभिन्न मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों और तकनीकों को सरल और स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है, जिससे छात्र और पेशेवर दोनों ही लाभान्वित हो सकें।
मुख्य सामग्री/कथानक
पुस्तक की शुरुआत मानसिक स्वास्थ्य के मूल्यांकन की आवश्यकता और महत्व से होती है। इसके बाद, लेखक विभिन्न प्रकार के मनोवैज्ञानिक परीक्षणों की चर्चा करता है, जैसे कि बुद्धिमत्ता के मापन के लिए मानक परीक्षण, व्यक्तित्व परीक्षण, और अन्य अभिज्ञानात्मक उपाय। लेखक ने प्रत्येक परीक्षण की प्रक्रिया, इसके परिणामों का मूल्यांकन, और चिकित्सकीय संदर्भ में इसके उपयोग को विस्तार से समझाया है। पुस्तक में वास्तविक जीवन के उदाहरण भी शामिल हैं, जो पाठकों को विभिन्न मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों के निदान में परीक्षणों के उपयोग को समझने में मदद करते हैं।
मुख्य विषय
1. मनोवैज्ञानिक परीक्षणों का महत्व: पुस्तक में यह स्पष्ट किया गया है कि कैसे विभिन्न परीक्षण मानसिक स्वास्थ्य की स्थितियों का सही निदान करने में सहायक होते हैं।
2. बुद्धिमत्ता के मापन के उपाय: बुद्धिमत्ता के विभिन्न पहलुओं को समझाने के लिए विभिन्न मापदंडों और परीक्षणों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।
3. नैतिकता और पेशेवरता: मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में नैतिकता, गोपनीयता और पेशेवर आचार संहिता की चर्चा की गई है।
महत्वपूर्ण सीख
- मनोवैज्ञानिक परीक्षणों का सही उपयोग मानसिक स्वास्थ्य के निदान में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- बुद्धिमत्ता और व्यक्तिगत विशेषताओं को मापने के लिए उपयुक्त परीक्षणों का चयन जरूरी है।
- नैतिक और पेशेवर मानदंडों का पालन करना सभी मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए अनिवार्य है, ताकि वे अपने ग्राहकों को उचित और प्रभावी सहायता प्रदान कर सकें।
इस प्रकार, "Psychodiagnostic" एक समृद्ध स्रोत है जो मानसिक स्वास्थ्य के पेशेवरों को परीक्षणों के उपयोग और उनके नैतिक पहलुओं को समझ
Memorable quotes
“प्रत्येक प्रत्यक्षीकरण एक प्रक्षेपण है।”
“परीक्षण का उद्देश्य व्यक्ति के आंतरिक जीवन को उसकी प्रतिक्रियाओं के माध्यम से प्रकट करना है।”
“स्याही के धब्बे केवल उत्तेजना सामग्री हैं; महत्वपूर्ण बात यह है कि व्यक्ति उनमें क्या देखता है।”
“एक अच्छी तरह से व्याख्या की गई रोर्शा प्रतिक्रिया व्यक्तित्व की एक विस्तृत तस्वीर प्रदान कर सकती है।”
Themes
- व्यक्तित्व मूल्यांकन
- प्रक्षेपी तकनीकें
- मनोवैज्ञानिक निदान
- प्रत्यक्षीकरण की भूमिका
- अचेतन मन
About the author
हरमन रोर्शा (1884-1922) एक स्विस मनोचिकित्सक और मनोविश्लेषक थे, जिन्हें रोर्शा स्याही धब्बा परीक्षण के निर्माता के रूप में जाना जाता है। उन्होंने ज्यूरिख विश्वविद्यालय में यूजीन ब्लूलर के तहत अध्ययन किया और कार्ल जंग के साथ काम किया, जिससे उन्हें अचेतन प्रक्रियाओं में गहरी रुचि विकसित हुई। "साइकोडायग्नोस्टिक" (1921) उनकी एकमात्र प्रकाशित पुस्तक थी, जिसमें उन्होंने अपने स्याही धब्बा परीक्षण की विधि और नैदानिक अनुप्रयोगों का वर्णन किया। उनकी असामयिक मृत्यु ने उनके काम के आगे के विकास को रोक दिया, लेकिन उनके परीक्षण ने व्यक्तित्व मूल्यांकन के क्षेत्र में एक स्थायी विरासत छोड़ी।
FAQ
What is Psychodiagnostic about?
हरमन रोर्शा की "साइकोडायग्नोस्टिक" पुस्तक रोर्शा स्याही धब्बा परीक्षण का परिचय देती है, जो व्यक्तित्व मूल्यांकन के लिए एक प्रक्षेपी तकनीक है। यह परीक्षण के प्रशासन, स्कोरिंग और व्याख्या के लिए एक व्यवस्थित विधि प्रस्तुत करती है, यह तर्क देते हुए कि व्यक्ति की अस्पष्ट धब्बों की धारणा उनकी अंतर्निहित मनोवैज्ञानिक संरचनाओं और भावनात्मक स्थितियों को प्रकट करती है।
Is Psychodiagnostic worth reading?
मनोविज्ञान के छात्रों और पेशेवरों के लिए, "साइकोडायग्नोस्टिक" एक ऐतिहासिक पाठ के रूप में पढ़ने लायक है जो प्रक्षेपी परीक्षण के क्षेत्र की नींव रखता है। यह रोर्शा परीक्षण के मूल सिद्धांतों और प्रारंभिक नैदानिक अनुप्रयोगों में अंतर्दृष्टि प्रदान करता है, हालांकि आधुनिक मनोविज्ञान में इसकी वैज्ञानिक वैधता पर बहस जारी है।
How does Psychodiagnostic end?
Spoiler: "साइकोडायग्नोस्टिक" किसी कथात्मक अंत के साथ समाप्त नहीं होती है। इसके बजाय, यह रोर्शा परीक्षण के नैदानिक अनुप्रयोगों और सीमाओं पर चर्चा के साथ समाप्त होती है, जिसमें भविष्य के शोध और परीक्षण के संभावित विकास के लिए सुझाव दिए गए हैं। यह परीक्षण के महत्व और मनोविज्ञान में इसके योगदान पर जोर देती है।
Who should read Psychodiagnostic?
नैदानिक मनोविज्ञान, मनोरोग विज्ञान और व्यक्तित्व मूल्यांकन में रुचि रखने वाले छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों को "साइकोडायग्नोस्टिक" पढ़नी चाहिए। यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो प्रक्षेपी तकनीकों के इतिहास और विकास को समझना चाहते हैं और रोर्शा के मूल विचारों से परिचित होना चाहते हैं।
How long does it take to read Psychodiagnostic?
"साइकोडायग्नोस्टिक" को पढ़ने में लगभग 3 से 4 घंटे लग सकते हैं, यह पाठक की गति और विषय वस्तु से परिचित होने पर निर्भर करता है। यह एक तकनीकी पाठ है जिसके लिए सावधानीपूर्वक पढ़ने और अवधारणाओं पर विचार करने की आवश्यकता होती है, इसलिए समय व्यक्तिपरक हो सकता है।